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वर्ण विचार 5
वर्ण विचार 5
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Q1.
जब एक ही व्यंजन का दो बार (एक आधा और एक पूरा) एक साथ प्रयोग हो, तो उसे व्याकरण में क्या कहते हैं?
जब एक ही व्यंजन का दो बार (एक आधा और एक पूरा) एक साथ प्रयोग हो, तो उसे व्याकरण में क्या कहते हैं?
[HSSC/SSC]
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🚩
Correct Answer: B
जैसे 'दिल्ली' में 'ल्ल', 'बच्चा' में 'च्च' और 'उज्ज्वल' में 'ज्ज'। जब एक समान व्यंजन डबल हो जाए, तो वह व्यंजन गुच्छ या द्वित्व कहलाता है।
जैसे 'दिल्ली' में 'ल्ल', 'बच्चा' में 'च्च' और 'उज्ज्वल' में 'ज्ज'। जब एक समान व्यंजन डबल हो जाए, तो वह व्यंजन गुच्छ या द्वित्व कहलाता है।
💡 Short Trick:
Trick: द्वित्व का मतलब ही 'दो' (Double) होता है।
Trick: द्वित्व का मतलब ही 'दो' (Double) होता है।
Q2.
'छ' वर्ण इनमें से किस श्रेणी में आता है?
'छ' वर्ण इनमें से किस श्रेणी में आता है?
[HSSC/SSC]
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🚩
Correct Answer: B
'च' वर्ग का दूसरा वर्ण 'छ' है। नियम के अनुसार पहला और दूसरा वर्ण अघोष होता है। दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण होता है। अतः 'छ' अघोष + महाप्राण दोनों है।
'च' वर्ग का दूसरा वर्ण 'छ' है। नियम के अनुसार पहला और दूसरा वर्ण अघोष होता है। दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण होता है। अतः 'छ' अघोष + महाप्राण दोनों है।
💡 Short Trick:
Trick: 'छ' (2nd number)। 1,2 = अघोष और 2,4 = महाप्राण। दोनों नियमों में '2' कॉमन है।
Trick: 'छ' (2nd number)। 1,2 = अघोष और 2,4 = महाप्राण। दोनों नियमों में '2' कॉमन है।
Q3.
स्वर-तंत्रियों (Vocal Cords) में कंपन के आधार पर 'ह' वर्ण क्या है?
स्वर-तंत्रियों (Vocal Cords) में कंपन के आधार पर 'ह' वर्ण क्या है?
[HSSC/SSC]
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🚩
Correct Answer: B
श, ष, स 'अघोष' होते हैं, लेकिन ऊष्म व्यंजनों में 'ह' इकलौता ऐसा वर्ण है जिसे बोलते समय गले में बहुत अधिक कंपन होता है, इसलिए यह सघोष है।
श, ष, स 'अघोष' होते हैं, लेकिन ऊष्म व्यंजनों में 'ह' इकलौता ऐसा वर्ण है जिसे बोलते समय गले में बहुत अधिक कंपन होता है, इसलिए यह सघोष है।
💡 Short Trick:
Trick: 'ह' से 'हँसना'। जब हम जोर से हँसते हैं तो पूरा शरीर (और गला) काँप (Vibrate) जाता है = सघोष।
Trick: 'ह' से 'हँसना'। जब हम जोर से हँसते हैं तो पूरा शरीर (और गला) काँप (Vibrate) जाता है = सघोष।
Q4.
हिंदी वर्णमाला में 'वर्गीय व्यंजनों' की कुल संख्या कितनी मानी जाती है?
हिंदी वर्णमाला में 'वर्गीय व्यंजनों' की कुल संख्या कितनी मानी जाती है?
[HSSC/SSC]
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🚩
Correct Answer: C
क-वर्ग से लेकर प-वर्ग तक (क से म तक) कुल 5 वर्ग होते हैं। हर वर्ग में 5 वर्ण होते हैं (5×5 = 25)। इन 25 व्यंजनों को ही वर्गीय या स्पर्श व्यंजन कहते हैं।
क-वर्ग से लेकर प-वर्ग तक (क से म तक) कुल 5 वर्ग होते हैं। हर वर्ग में 5 वर्ण होते हैं (5×5 = 25)। इन 25 व्यंजनों को ही वर्गीय या स्पर्श व्यंजन कहते हैं।
💡 Short Trick:
Trick: 'वर्ग' (Square) का मतलब 5x5 का ग्रिड = 25।
Trick: 'वर्ग' (Square) का मतलब 5x5 का ग्रिड = 25।
Q5.
जिन ध्वनियों के उच्चारण में हवा केवल मुँह से निकलती है (नाक का प्रयोग नहीं होता), उन्हें क्या कहते हैं?
जिन ध्वनियों के उच्चारण में हवा केवल मुँह से निकलती है (नाक का प्रयोग नहीं होता), उन्हें क्या कहते हैं?
[HSSC/SSC]
🤍
🚩
Correct Answer: B
जैसे अ, आ, इ आदि। इनमें नाक का कोई प्रयोग नहीं होता, इसलिए ये निरनुनासिक (मौखिक स्वर) कहलाते हैं। अनुनासिक (ँ) में नाक और मुँह दोनों का प्रयोग होता है।
जैसे अ, आ, इ आदि। इनमें नाक का कोई प्रयोग नहीं होता, इसलिए ये निरनुनासिक (मौखिक स्वर) कहलाते हैं। अनुनासिक (ँ) में नाक और मुँह दोनों का प्रयोग होता है।
💡 Short Trick:
Trick: 'निर्' (बिना) + 'अनुनासिक' (नाक) = बिना नाक के (सिर्फ मुँह से)।
Trick: 'निर्' (बिना) + 'अनुनासिक' (नाक) = बिना नाक के (सिर्फ मुँह से)।
Q6.
'अं' और 'अः' को 'अयोगवाह' का नाम किस प्रसिद्ध भाषा-विद्वान ने दिया था?
'अं' और 'अः' को 'अयोगवाह' का नाम किस प्रसिद्ध भाषा-विद्वान ने दिया था?
[HSSC/SSC]
🤍
🚩
Correct Answer: A
किशोरीदास वाजपेयी जी ने ही अपनी व्याकरण में स्पष्ट किया था कि 'अं' और 'अः' न तो पूरी तरह स्वर हैं और न ही व्यंजन, इसलिए ये 'अयोगवाह' हैं।
किशोरीदास वाजपेयी जी ने ही अपनी व्याकरण में स्पष्ट किया था कि 'अं' और 'अः' न तो पूरी तरह स्वर हैं और न ही व्यंजन, इसलिए ये 'अयोगवाह' हैं।
💡 Short Trick:
Trick: जो स्वर और व्यंजन दोनों में 'किशोर' (बच्चे) की तरह इधर-उधर घूमते रहें, वो अयोगवाह हैं।
Trick: जो स्वर और व्यंजन दोनों में 'किशोर' (बच्चे) की तरह इधर-उधर घूमते रहें, वो अयोगवाह हैं।
Q7.
विसर्ग (ः) का उच्चारण किस व्यंजन की भाँति (समान) होता है?
विसर्ग (ः) का उच्चारण किस व्यंजन की भाँति (समान) होता है?
[HSSC/SSC]
🤍
🚩
Correct Answer: B
जैसे 'अतः' (Atah), 'दुःख' (Duhkha), 'प्रातः' (Pratah)। विसर्ग हमेशा आधे 'ह' (ह्) की तरह साउंड करता है और इसका प्रयोग ज्यादातर तत्सम (संस्कृत) शब्दों में होता है।
जैसे 'अतः' (Atah), 'दुःख' (Duhkha), 'प्रातः' (Pratah)। विसर्ग हमेशा आधे 'ह' (ह्) की तरह साउंड करता है और इसका प्रयोग ज्यादातर तत्सम (संस्कृत) शब्दों में होता है।
💡 Short Trick:
Trick: दुःख में मुँह से 'हा / ह' की आह निकलती है।
Trick: दुःख में मुँह से 'हा / ह' की आह निकलती है।
Q8.
'श' (शलजम वाला) वर्ण का सही उच्चारण स्थान क्या है?
'श' (शलजम वाला) वर्ण का सही उच्चारण स्थान क्या है?
[HSSC/SSC]
🤍
🚩
Correct Answer: C
ऊष्म व्यंजनों का सही क्रम और स्थान है: श (तालव्य), ष (मूर्धन्य), स (दन्त्य)।
ऊष्म व्यंजनों का सही क्रम और स्थान है: श (तालव्य), ष (मूर्धन्य), स (दन्त्य)।
💡 Short Trick:
Trick: 'श' से 'शादी'। शादी के बाद रिश्ते में 'ताल-मेल' (तालव्य) बिठाना पड़ता है। (और 'स' से 'सपेरा', साँप 'दाँत' मारता है = दन्त्य)।
Trick: 'श' से 'शादी'। शादी के बाद रिश्ते में 'ताल-मेल' (तालव्य) बिठाना पड़ता है। (और 'स' से 'सपेरा', साँप 'दाँत' मारता है = दन्त्य)।
Q9.
इनमें से कौन-सा स्वर 'मूल दीर्घ स्वर' नहीं है, बल्कि 'संयुक्त स्वर' है?
इनमें से कौन-सा स्वर 'मूल दीर्घ स्वर' नहीं है, बल्कि 'संयुक्त स्वर' है?
[HSSC/SSC]
🤍
🚩
Correct Answer: D
आ (अ+अ), ई (इ+इ), ऊ (उ+उ) सजातीय या मूल दीर्घ स्वर हैं क्योंकि ये एक ही परिवार से बने हैं। जबकि 'ओ' (अ+उ) दो अलग-अलग स्वरों के मेल से बना है, इसलिए यह विजातीय या संयुक्त स्वर है।
आ (अ+अ), ई (इ+इ), ऊ (उ+उ) सजातीय या मूल दीर्घ स्वर हैं क्योंकि ये एक ही परिवार से बने हैं। जबकि 'ओ' (अ+उ) दो अलग-अलग स्वरों के मेल से बना है, इसलिए यह विजातीय या संयुक्त स्वर है।
💡 Short Trick:
Trick: जो अलग-अलग खून (अ और उ) से मिलकर बने, वो संयुक्त (Joint) स्वर है।
Trick: जो अलग-अलग खून (अ और उ) से मिलकर बने, वो संयुक्त (Joint) स्वर है।
Q10.
'क्ष', 'त्र', 'ज्ञ', 'श्र' को वर्णमाला के 33 'मूल' व्यंजनों में क्यों नहीं गिना जाता?
'क्ष', 'त्र', 'ज्ञ', 'श्र' को वर्णमाला के 33 'मूल' व्यंजनों में क्यों नहीं गिना जाता?
[HSSC/SSC]
🤍
🚩
Correct Answer: C
33 मूल व्यंजनों की गिनती में इन्हें शामिल नहीं करते क्योंकि ये पहले से मौजूद वर्णों (जैसे क्+ष=क्ष, त्+र्=त्र) का ही संयुक्त रूप हैं। ये कोई नई स्वतंत्र ध्वनि नहीं हैं।
33 मूल व्यंजनों की गिनती में इन्हें शामिल नहीं करते क्योंकि ये पहले से मौजूद वर्णों (जैसे क्+ष=क्ष, त्+र्=त्र) का ही संयुक्त रूप हैं। ये कोई नई स्वतंत्र ध्वनि नहीं हैं।
💡 Short Trick:
Trick: जो खुद 'उधार' (दो वर्णों के जोड़) से बने हों, उन्हें 'मूल' (Basic) संपत्ति में कैसे गिन सकते हैं!
Trick: जो खुद 'उधार' (दो वर्णों के जोड़) से बने हों, उन्हें 'मूल' (Basic) संपत्ति में कैसे गिन सकते हैं!
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